Chinese डोमिनेंस से लेकर नियर-टोटल बेन तक, Bitcoin Mining का सफर पिछले पांच सालों में काफी ड्रामेटिक रहा है। जो शुरुआत में एक क्रैकडाउन था जिसके शॉकवेव्स पूरे ग्लोबल नेटवर्क में महसूस किए गए, वो आज एक काफी नुआन्सद रियलिटी में बदल चूका है। China के अंदर Bitcoin Mining अब और भी ज़्यादा पैमाने में हो रही है, पर एक छोटे, डीसेंट्रलाइज्ड और काफी हद तक अंडरग्राउंड ऑपरेशन्स के मदद से। पर अब सवाल ये आता है की ये बढ़ोतरी आई कैसे? आइए समझते है।
2021 से पहले China Bitcoin Mining में कितना डोमिनेंट था?
2021 के क्रैकडाउन से पहले, China ग्लोबल Bitcoin Mining का निर्विवाद राजा हुआ करता था। Cambridge Bitcoin Electricity Consumption Index के हिसाब से, 2020 में Chinese माइनर्स के पास दुनिया के टोटल हैशिंग पावर का लगभग 65% हिस्सा था। Sichuan (हाइड्रोपावर), Inner Mongolia और Xinjiang (कोल और विंड) जैसे प्रॉविन्सेस दुनिया की सबसे सस्ती बिजली ऑफर करते थे, जिसकी वजह से यहाँ विशाल इंडस्ट्रियल-स्केल माइनिंग फार्म्स खड़े हुए थे और जिससे Bitcoin Mining काफी ज़्यादा प्रॉफिटेबल बन गया था।

2021 में China ने Bitcoin Mining को बैन क्यों किया?
May–September 2021 के बीच Chinese ऑथॉरिटीज़ ने Bitcoin Mining के खिलाफ एक नेशनवाइड क्रैकडाउन लॉंच किया, जिसके पीछे तीन मेजर कंसर्नस थे: फाइनेंसियल स्टेबिलिटी रिस्क्स, क्रिप्टो चैनल्स के ज़रिए कैपिटल फ्लाइट, और एक्सेसिव इलेक्ट्रिसिटी कोन्सुम्प्शन जो उनके कार्बन-न्यूट्रैलिटी गोल्स के खिलाफ जाता था। September 2021 में, People’s Bank of China ने एक कदम और आगे बढ़कर सारे क्रिप्टो-सम्बंधित ट्रांसेक्शन्स को इललीगल डिक्लेअर कर दिया। इसका रिजल्ट तुरंत और काफी ब्रूटल था: हज़ारों माइनिंग रिग्स रातो रात बंद हो गए, और ग्लोबल Bitcoin नेटवर्क का हेशरेट कुछ ही हफ़्तों में लगभग 50% गिर गया, क्यूंकि ऑपरेटर्स ने या तो मशीन्स ऑफ कर दी या जल्दी-जल्दी उन्हें बहार भेज दिया।

क्या इस बैन से ग्लोबल एनर्जी पर कोई फर्क पड़ा?
नहीं। China का शेयर ज़रूर गिरा, पर Bitcoin Mining सिर्फ माइग्रेट हो गया। United States, Kazakhstan, Russia और Canada ने एक्साईल्ड हेशरेट को तेज़ी से अब्सॉर्ब कर लिया। ग्लोबल इलेक्ट्रिसिटी कन्सम्प्शन 2021 के 89 TWh से बढ़कर 2023 तक लगभग 121 TWh तक पहुँच गया, जो ये साबित करता है की एक देश Bitcoin Mining को बेन करके ग्लोबल एनर्जी डिमांड को कम नहीं कर सकती – वो सिर्फ लोकेशन चेंज करता है।

China में Bitcoin Mining वापस कैसे आ रहा है?
काफी स्ट्रक्चरल फैक्टर्स ने मिलकर Bitcoin Mining के कमबैक को मुमकिन बनाया:
- वेस्टर्न प्रॉविन्सेस में चीप और स्ट्रेन्डेड एनर्जी की भरमार, जिसे कोस्टल सिटीज़ तक एफ्फिसेंटली ट्रांसमिट नहीं किया जा सकता।
- 2021–2023 टेक बूम के समय डेटा सेंटर्स का मैसिव ओवरबिल्डिंग, जिसका रिजल्ट ये हुआ की ओनर्स को ऐसे टेनेंट्स की ज़रुरत पड़ गयी जो पावर और कूलिंग के लिए कन्सिस्टेंटली पे कर सके।
- 2024 से Bitcoin का प्राइस $80,000–$90,000 के ऊपर चल रहा है, जिसने माइनिंग मार्जिन्स को काफी बेहतर कर दिया, यहां तक की रेलटिव्ली एक्सपेंसिव इलेक्ट्रिसिटी के साथ भी।
- एनर्जी-रिच रिजिएंस के लोकल गवर्नमेंट्स का चुप-चाप Bitcoin Mining को टॉलरेट या कभी-कभी प्रोत्साहित करना, ताकि सरप्लस कैपेसिटी यूज़ हो जाए और टैक्स रेवेन्यू भी जेनेरेट हो।
आखिर में…
2021 का क्रैकडाउन देखकर लग रहा था की China की Bitcoin Mining इंडस्ट्री का चैप्टर ख़तम हो चूका है, पर नेटवर्क की एंटी फ़्रिजाइल डिज़ाइन और सिंपल इकोनॉमिक्स ने माइनिंग को वापस ज़िंदा कर दिया। आज लगभग 15–20% ग्लोबल BTC माइनिंग चुप चाप China के अंदर ही होता है, उसी देश में जिसने कभी इसे पूरी तरह बेन करने की कोशिश की थी।
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