2025 में भारत अपने खुद के Generative AI Model को डेवलप करने के लिए प्लेन कर रहा है, जिसका अगले 6 से 8 महीने में पूरी तरह से बनने की उम्मीद है। ये अनाउंसमेंट Union Minister of Electronics and Information Technology, Ashwini Vaishnaw ने Utkarsh Odisha Conclave के दौरान की। ये स्टेप भारत के 55th World Economic Forum के एनुअल मीटिंग में भाग लेने के बाद लिया गया है, जो Switzerland के Davos-Klosters में हुई थी। चलिए इस स्टेप को गहराई से समझते है।
भारत इस Generative AI Model के लिए कैसे तैयार हो रहा है?
कॉन्क्लेव के दौरान Minister Vaishnaw ने सरकार के प्लेन्स शेयर किए, जहा उन्होंने कहा की वो भारत में Generative AI Models के डेवलपमेंट के लिए एक मज़बूत फाउंडेशन बनाएंगे। उन्होंने बताया की देश ने इस नए AI इंफ्रास्ट्रक्चर को सपोर्ट करने के लिए 18,600 हाई-एन्ड GPUs खरीदे हैं। ये इन्वेस्टमेंट Generative AI Models के लिए बैकबोन का काम करेगा, जो इस साल के अंदर ही डेवलप होने वाले है।
Vaishnaw ने भारतीय डेवलपर्स की क्षमताओं को लेकर काफी सकारात्मकता दिखाई, और कहा की कम से कम 6 मेजर डेवलपर्स इन Generative AI Models को 6 से 8 महीनो में पूरा करेंगे। उन्होंने एक कॉमन कंप्यूट फैसिलिटी के महत्त्व पर भी काफी ज़ोर दिया, जो AI इकोसिस्टम को मज़बूत बनाने में मदद करेगा। ये फैसिलिटी रिसर्चर्स, स्टार्टअप्स, और अकादमिक इंस्टीटूशन्स के लिए कम्प्यूटेशनल ज़रूरतों को पूरा करेगी, और कोलैबोरेशन और इनोवेशन को बूस्ट करेगी।
जो भी कंप्यूट फैसिलिटी होगी, वो क्लाउड-बेस्ड सर्वर्स का इस्तेमाल करेगी जो खासकर इन Generative AI Models के लिए डिज़ाइन किए गए हैं। Vaishnaw ने बताया की GPUs खरीदने का टारगेट पहले 10,000 था, लेकिन अब तक 18,000 से ज़्यादा हाई-एन्ड मॉडल्स खरीदे जा चुके हैं, इससे यह पता चलता है की भारत सरकार इस स्टेप को लेकर कितनी सीरियस है।

ये Generative AI Model बाकी मॉडल्स से कैसे अलग होगा?
Vaishnaw ने भारत के GPU रेसोर्सेस की तुलना ग्लोबली लीडिंग AI मॉडल्स के रेसोर्सेस से की। उन्होंने बताया की ChatGPT को 25,000 GPUs पर ट्रैन किया गया था, और अभी भारत के पास 18,000 से ज़्यादा हाई-एन्ड GPUs हैं। इससे भारत को ग्लोबल AI लैंडस्केप में एक कॉम्पिटिटिव पोजीशन मिल रही है, जो आगे चलकर अलग अलग सेक्टर्स के लिए Generative AI Models डेवलप करने में मदद करेगा।
उन्होंने ये भी कहा की जब भारतीय Generative AI models डेप्लॉय होंगे,वो सबके लिए एक्सेसिबल होंगे। लेकिन उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया की ये मॉडल्स ओपन-सोर्स होंगे या APIs के मदद से अवेलेबल होंगे, और ये पूरे AI कम्युनिटी के लिए बहुत बड़ी बात है।
AI सेफ्टी और सिक्योरिटी पर क्या असर होगा?
टेक्निकल अडवांसमेंट्स के साथ, Vaishnaw ने Generative AI Models के सेफ्टी और सिक्योरिटी को लेकर भी प्लेन्स शेयर किए। उन्होंने एक AI सेफ्टी इंस्टीटूशन बनाने का प्लेन अनाउंस किया, जो hub-and-spoke मॉडल पर काम करेगा। ये मॉडल दूसरे देशों के सेंट्रलाइज्ड रेगुलेटरी फ़्रेमवर्क्स से अलग होगा। भारत कई सारे ऐसे इंस्टीटूशन्स को प्रोत्साहित करेगा की वो सेफ्टी टूल्स और फ़्रेमवर्क्स डेवलप करें।
यह स्टेप AI गवर्नेंस पर एक प्रोएक्टिव एप्रोच को दिखाता है, जो AI टेक्नोलॉजीज़ के पोटेंशियल रिस्क्स को समझता है। इंस्टीटूशन्स के बीच कोलैबोरेशन से भारत एक कम्प्रेहैन्सिव सेफ्टी फ्रेमवर्क बनाने की कोशिश करेगा, जो AI के रैपिडली इवॉल्विंग लैंडस्केप के साथ एडाप्ट हो सके।
अगर भारत अपने AI के लक्ष्यों के साथ आगे बढ़ना चाहता है, तो सेफ्टी और सिक्योरिटी पे फोकस करना बहुत ही ज़रूरी है। एक डेडिकेटेड AI सेफ्टी इंस्टीटूशन बनाने से पब्लिक ट्रस्ट और कॉन्फिडेंस बनेगा, जो आगे चलकर AI टेक्नोलॉजीज़ के एडॉप्शन और इनोवेशन को आगे बढ़ाने में मदद करेगा।
आखिर मे…
जैसे-जैसे भारत अपने खुद के Generative AI Models डेवलप करने की तरफ आगे बढ़ रहा है, देश का टेक्नोलॉजी सेक्टर में इनोवेशन और ग्रोथ को प्रोमोट करने का कमिटमेंट साफ़ नज़र आता है। हाई-एन्ड GPUs का मज़बूत इंफ्रास्ट्रक्चर और सेफ्टी और सिक्योरिटी पर फोकस के साथ, भारत अपने आप को AI के इस दौर में आगे ला रहा है।
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