ITAT ruling, Income Tax Appellate Tribunal (ITAT) ने हाल ही में एक बहुत ही ज़रूरी फैसला सुनाया है जिसमे उन्होंने क्रिप्टोकरेंसी को भारत के कर कानून के अंडर एक नए तरीके से ट्रीट करने की बात की। इस निर्णय से अब क्रिप्टोकरेंसी जैसे Bitcoin, Ethereum, और दुसरे डिजिटल एसेट्स को कैपिटल एसेट्स माना जायेगा, जो की लॉन्ग टर्म ट्रांसेक्शन्स को समझने में मदद करेगा। अब क्रिप्टोकरेंसी सेल्स पर कैपिटल गेन्स टैक्स लगेगा, जो की क्रिप्टो होल्डर्स के लिए पहले से ज़्यादा फायदेमंद रहेगा।
यहाँ ध्यान देने वाली बात यह है की यह ITAT Ruling एक काफी दिलचस्प कारण से हुई, आइए विस्तार से समझते है।
ITAT Ruling का केस क्या था?
दरअसल हुआ यू की ITAT के पास Raunaq Prakash Jain नाम के इंसान का केस आया जिसने 2015-2016 में ₹5.06 lakh रूपए के क्रिप्टोकरेंसी खरीदे और 2020-21 में उसे ₹6.69 crore में बेचा। अब क्यूंकि उसने क्रिप्टोकरेंसी को 3 साल से ज़्यादा समय तक रखा, ITAT Ruling ने उसके गेन्स को लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स के रूप में क्लासिफ़ाइ किया। यह क्लासिफिकेशन काफी ज़रूरी है, क्यूंकि लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स पे आम तौर पर टैक्स रेट दुसरे सोर्स के इनकम से कम होते हैं।

टैक्स ऑथॉरिटीज़ को भी ये आर्डर दिया गया की लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स के लिए Income Tax Act के अंडर जो भी डिडक्शन्स अवेलेबल हैं, वो टैक्स देने वाले को मिलें। यह ITAT Ruling ना सिर्फ एक मिसाल बनती है, बल्कि 2022 के अप्रिल में VDAs के लिए विशिष्ट रेगुलेशंस आने से पहले की क्रिप्टोकरेंसी ट्रांसेक्शन्स के लिए भी एक बेहतर टैक्स फ्रेमवर्क उपलभ्द करवाती है।
ITAT Ruling के मुख्य हाइलाइट्स क्या है?
- क्रिप्टोकरेंसी को कैपिटल एसेट्स मानना: ITAT Ruling में क्रिप्टोकरेंसी को कैपिटल एसेट्स माना गया है, जो स्टॉक्स और प्रॉपर्टी जैसे ट्रेडिशनल इन्वेस्टमेंट की तरह होते हैं। इससे क्रिप्टोकोर्रेंसी से होने वाले प्रॉफ़िट्स को कैपिटल गेन्स के श्रेणी में टैक्स किया जाएगा।
- प्री-2022 ट्रांसेक्शन्स का टैक्स ट्रीटमेंट: 2022 से पहले क्रिप्टोकरेंसी का टैक्स ट्रीटमेंट क्लियर नहीं था। ITAT ने कहा की:
- क्रिप्टोकरेंसी के सेल से होने वाले प्रॉफ़िट्स को कैपिटल गेन्स समझा जायेगा।
- अगर होल्डिंग पीरियड 3 साल से ज़्यादा हो, तो यह लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स होंगे और कम टैक्स लगेगा।
- पोस्ट-अप्रिल 2022 के टैक्स नियम: अप्रिल 2022 से सर्कार ने क्रिप्टोकरेंसी पे सीधा 30% टैक्स लगा दिया है, चाहे होल्डिंग पीरियड कितना भी हो। इसमें कोई डिडक्शन्स नहीं मिलते, सिर्फ एक्वीजीशन कॉस्ट का डिडक्शन होता है।
ITAT Ruling के व्यापक प्रभाव क्या है?
- प्री-2022 के इन्वेस्टर्स को राहत: जो लोग 2022 से पहले क्रिप्टोकरेंसी ट्रांसेक्शन्स कर चुके हैं, ITAT Ruling के तहत उन्हें अब कैपिटल गेन्स टैक्स ट्रीटमेंट मिलेगा और यहाँ तक की टैक्स में बड़ी छूट भी मिल सकती हैं।
- रिकॉर्ड-कीपिंग ज़रूरी बन जाता है: इन्वेस्टर्स को अब अपने क्रिप्टोकरेंसी ट्रांसेक्शन्स के सही रेकॉर्ड्स रखने होंगे जैसे परचेस डेट, सेल डेट, कॉस्ट, और प्रॉफ़िट्स, ताकि बाद में टैक्स का हिसाब और डिडक्शन्स सही से हो सकें।
- नियामक स्पष्टता को बढ़ावा देना: ITAT Ruling ने क्रिप्टोकरेंसी को ट्रेडिशनल फाइनेंशियल एसेट्स की तरह ट्रीट किया है, जो आगे चलकर भारत में डिजिटल एसेट्स के रेगुलेशन को और भी डेवलप करने में मदद करेगा।
ITAT Ruling क्रिप्टो इन्वेस्टर्स के लिए क्या मायने रखता है?
ITAT Ruling उन इन्वेस्टर्स के लिए काफी फायदेमंद है जो 2022 से पहले क्रिप्टोकरेंसी बेच चुके हैं। उन्हें लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स पर कम टैक्स रेट्स मिलेंगे, और अगर वो अपने प्रॉफ़िट्स को रेसिडेंशियल प्रॉपर्टी में रीइन्वेस्ट करते हैं, तो वो और ज़्यादा टैक्स कम कर सकते हैं। इसलिए, प्री-2022 इन्वेस्टर्स के लिए अपने ट्रांसेक्शन्स को अच्छे से प्लान करना ज़रूरी है ताकि वो अपने टैक्स आउटकम को सुधार सकें।
2022 के बाद क्रिप्टोकरेंसी बेचने पर, 30% का टैक्स रेट काफी प्रभाव दाल रहा था, ख़ास कर शार्ट-टर्म ट्रेडर्स के लिए। इसमें कोई डिडक्शन्स नहीं मिलते, इसलिए इन्वेस्टर्स को अपने ट्रांसेक्शन्स प्लेन करते वक़्त हाई टैक्स रेट को ध्यान में रखना होगा। आगे चलके, एक सफल क्रिप्टो इन्वेस्टमेंट करने के लिए हमे यह समझना होगा की होल्डिंग पीरियड के हिसाब से टैक्स कैसे लगता है, और साथ ही रेगुलेशंस में क्या बदलाव आया है।
आखिर मे…
ITAT Ruling भारत में क्रिप्टो टैक्सेशन की एक बहुत बड़ी उप्लभ्धि है। इस रूलिंग से क्रिप्टो को कैपिटल एसेट्स के रूप में जाना जायेगा, जो रियल एस्टेट और स्टॉक्स जैसे इंवेस्टमेंट्स की तरह टैक्स किए जाते हैं। इससे इन्वेस्टर्स को स्पष्ठता मिलती है और भारत के डिजिटल एसेट्स के लिए रेगुलेटरी फ्रेमवर्क को सुधारने में मदद भी मिलती है। इन्वेस्टर्स को अपने रेकॉर्ड्स को ढंग से मेन्टेन करना होगा और अपनी इन्वेस्टमेंट प्लैनिंग को इस रूलिंग के हिसाब से एडजस्ट करना होगा।
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