2019 में Pi Network ने क्रिप्टो दुनिया में धमाका कर दिया था, एक अनोखे वादे के साथ: क्रिप्टो माइनिंग को हर किसी के लिए एक्सेसिबल बनाना, सिर्फ अपने स्मार्टफोन के मदद से टोकंस माइन करके। जहां Bitcoin जैसे ट्रेडिशनल क्रिप्टोकरेन्सिस में हैवी और एनर्जी-कंस्यूमिंग हार्डवेयर की ज़रूरत पड़ती है, Pi Network ने एक सिंपल और लौ-बैरियर ऑप्शन दिया। इस वजह से दुनिया भर के 70 million से ज़्यादा यूज़र्स ने इसमें इंटरेस्ट लिया।
Pi Network ने क्या वादा किया था?
Pi Network ने लोगो को अपनी सिंपल और इजी क्रिप्टो माइनिंग की विशन से आकर्षित किया। ये दरअसल 14 March 2019 (Pi Day) को लांच हुआ था — जो मैथमेटिकल कांस्टेंट π (3.14) को सेलिब्रेट करता है। आईडिया ये था की कोई भी स्मार्टफोन यूज़र सिर्फ एक बार टेप करके डेली Pi टोकंस माइन कर सकता है।
Pi Network ने Stellar Consensus Protocol (SCP) का इस्तेमाल किया — जिसमे एनर्जी एफिशिएंसी और डीसेंट्रलाइज़शन पे फोकस था — जो Bitcoin के एनर्जी-हैवी proof-of-work मॉडल से बिलकुल अलग था। रेफरल मॉडल ने इसकी ग्रोथ को बूस्ट किया, जिसमे यूज़र्स नए लोगों को इन्वाइट करके अपना माइनिंग स्पीड बड़ा सकते थे। ये तरीका वायरल हो गया, और बहुत से लोग ये मानने लगे की Pi अगला बड़ा क्रिप्टो बनेगा।

Pi Network ने अब तक क्या डिलीवर किया है?
Pi Network का रोडमैप एक स्टेप-बाई-स्टेप प्रोग्रेशन का था — मोबाइल माइनिंग, टेस्टनेट, KYC कन्फर्मेशन, और मैन नेट लॉंच। लेकिन मैन नेट का पूरी तरह से फंक्शनल स्टेज तक पहुंचना काफी दिलेज़ का शिकार रहा। February 2025 में आख़िरकार ओपन मैन नेट लाइव हो गया जिसमे एक्सटर्नल ट्रेडिंग अलाव की गयी, लेकिन दिक्कत अब भी बाकी थी।
KYC वेरिफिकेशन का प्रोसेस स्लो था, जिसकी वजह से काफी यूज़र्स अपने माइंड टोकंस ट्रांसफर नहीं कर पा रहे थे। टोकन का प्राइस जो कभी $2.98 था, May 2025 तक गिर के सिर्फ $0.58 रह गया — मतलब लगभग 70% ड्राप। रियल-वर्ल्ड यूज़ केसेस सिर्फ लिमिटेड कम्युनिटी मार्केट्स तक ही सिमित रहे, जिससे Pi Network का इकोसिस्टम स्ट्रांग नहीं बन पाया।
क्या Pi Network एक स्कैम है?
Pi Network एक स्कैम है या बस एक फ़ैल हुआ प्रोजेक्ट, ये तय करना थोड़ा मुश्किल है।
दूसरे आम स्कैम्स जैसे ये सामने से पैसा नहीं मांगता था — सिर्फ डेली ऐप इस्तेमाल करने को कहता था। लेकिन इसका रेफरल मॉडल मल्टी-लेवल मार्केटिंग जैसा ही लगता है, और एड्स से पैसा कमाने का मॉडल, KYC डेटा एक्सप्लोइटेशन को लेकर भी सवाल उठाता है।
जहाँ 70 million यूज़र्स का क्लेम है, ब्लॉकचैन डेटा के हिसाब से सिर्फ 9.11 मिलियन वॉलेट्स एक्सिस्ट करते हैं, और एक्टिव डेली यूज़र्स सिर्फ 20,000 हैं — इससे ये लगता है की एक्टिविटी काफी बढ़ा चढ़ाकर दिखाई गयी है। क्रिटिक्स कहते हैं की ट्रांसपरेंसी की कमी और वादों का पूरा न होना इस प्रोजेक्ट को कंफ्यूशन और डाउट के ज़ोन में ले जाता है।

क्या Pi Network अपनी मोमेंटम वापस पा सकता है?
Pi Network के लिए कमबैक मुश्किल है, लेकिन नामुमकिन नहीं। अगर ये ट्रस्ट और क्रेडिबिलिटी वापस पाना चाहता है तो कुछ ज़रूरी स्टेप्स लेने होंगे:
- अपना कोदेबेस ओपन-सोर्स करना जिससे कम्युनिटी ऑडिट और ट्रांसपेरेंसी बढे।
- रियल यूज़ केसेस क्रिएट करना जैसे पेमेंट्स, या डीसेंट्रलाइज्ड ऐप्स।
Pi के रीसेंट अपडेट्स से पता चलता है की यह कुछ हद्द तक सफल भी रहा— इसका रीसेंट 7-दिन का 114% ग्रोथ इस बात का सबूत है। अगर ये Binance जैसे बड़े एक्सचैंजेस पे लिस्ट हो जाए, तो लिक्विडिटी और भी बेहतर हो सकती है। गवर्नेंस को डीसेंट्रलाइज करना भी ब्लॉकचैन फिलोसोफी के साथ अलाइन करेगा।
लेकिन अब जब यूज़र इंटरेस्ट गिर रहा है और टोकन प्राइस भी काफी नीचे जा चूका है, तो Pi Network के पास अपनी मोमेंटम को वापस लाने के लिए समय कम है।

आखिर में…
Pi Network ने एक बोल्ड आईडिया के साथ शुरुआत की — क्रिप्टो माइनिंग को सब के लिए मुमकिन बनाना। इस नए कांसेप्ट ने दुनिया भर में लोगों का इंटरेस्ट ग्रैब किया। लेकिन बार-बार दिलेज़, सेंट्रलाइज्ड कण्ट्रोल, और लिमिटेड यूटिलिटी ने ये सवाल खड़ा किया है की क्या ये अपने वादों पर खड़ा उतर पाएगा या नहीं। इसके आगे का फ्यूचर देपेंद करेगा ट्रांसपेरेंसी, रियल यूटिलिटी, और कम्युनिटी के भरोसे पर।
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