क्रिप्टो मार्केट की दुनिया किसी रोलरकोस्टर से कम नहीं। यहाँ छोटी से छोटी मूवमेंट भी बड़ा प्रॉफिट या लॉस करवा सकती है। अगर आप चाहते है की बिना किसी बड़े कैपिटल के मार्केट के स्विंग्स का फायदा उठाये और liquidation के रिस्क से बचे रहे तो आज हमआप के लिए लाए है Leveraged Tokens |
ट्रेडिशनल ट्रेडिंग मेथड्स के मुकाबले leveraged tokens एक आसान तरीका प्रोवाइड करते है जिससे आपके रिटर्न्स मल्टीप्लाई हो सकते है। मान लिजिए आप ₹10,000 इन्वेस्ट करते है एक 3x leveraged टोकन में जो Bitcoin के साथ जुड़ा हुआ है। अब देखिए जब Bitcoin 1% बढ़ोत्तरी दिखाता है, तो आपका इन्वेस्टमेंट 3 % बढ़ेगा, बिना मार्जिन ट्रेडिंग के झंझट के। और सबसे अच्छी बात यह है की वोलैटिलिटी के बावजूद, आपको liquidation का रिस्क नहीं होता।
Leveraged Tokens क्या होते है?
Leveraged Tokens एक ख़ास टाइप का क्रिप्टोकरेंसी डेरिवेटिव है जो आपको किसी भी अंडरलाइंग एसेट जैसे Bitcoin (BTC) या Ethereum (ETH), के प्राइस मूवमेंट से ज़्यादा फायदा लेने के मौका देते है। ट्रेडिशनल leveraged ट्रेडिंग में मार्जिन और कोलैटरल की ज़रूरत होती है, पर इन टोकंस का तरीका और भी आसान होता है, क्यों की लेवरेज सीधे टोकन में ही एम्बेडेड रहती है।
हर Leveraged टोकन perpetual कॉन्ट्रैक्ट पोज़िशन्स का एक कलेक्शन होता है, जो अंडरलाइंग एसेट के ऊपर बेस्ड होता है, और एक फिक्स्ड लेवरेज रेश्यो मेन्टेन करता है। जैसे 2x, 3x या ज़्यादा। मान लिजिए एक 3x leveraged टोकन Bitcoin को ट्रैक करता है, अगर Bitcoin का प्राइस 1% की बढ़ोत्तरी दिखाता है, तो टोकन का भाव 3 % बढ़ेगा। और अगर Bitcoin का प्राइस 1 % गिरता है तब टोकन का भाव भी 3 % तक गिरेगा। इस तरीके से इन्वेस्टर्स मार्केट मूवमेंट्स का फायदा उठा सकते है बिना मार्जिन ट्रेड के झंझट के।
इनकी एक ख़ास बात यह है की यह perpetual प्रोडक्ट्स होते है, इसका मतलब इनकी कोई एक्सपाइरी डेट नहीं होती। इसलिए यह ट्रेडिशनल लेवरेज पोज़िशंस की तरह liquidate नहीं होते, और इनका प्राइस भी कभी zero नहीं होता, जो एक एक्स्ट्रा सिक्योरिटी देती है।
Leveraged Tokens काम कैसे करते है?
यह टोकंस एक एल्गोरिथम और rebalancing मेकेनिज़म को इस्तेमाल करके किसी भी अंडरलाइंग क्रिप्टोकरेंसी के प्राइस मूवमेंट को एम्पलीफाई करता है। इन टोकंस में फिक्स्ड या वैरिएबल लेवरेज रेश्यो होता है, जैसे 2x , 3x या 4x बिना मार्जिन ट्रेडिंग के ज़रुरत के।
इनका कोर फंक्शनालिटी rebalancing में होता है, rebalancing टोकन के डेली एक्सपोज़र को एडजस्ट करता है, ताकि लेवरेज रेश्यो मेन्टेन हो सके।
Rebalancing का तरीका हर प्लेटफार्म में अलग होता है, ज़्यादा तर प्लेटफार्म में यह एक फिक्स्ड टाइम में होता है, जैसे की रात के 2 बजे, या फिर जब मार्केट कंडीशंस मेजर प्राइस मूवमेंट्स ट्रिगर करते है। Rebalancing के दौरान, अगर प्राइस बढ़ता है तो प्रॉफिट रीइन्वेस्ट हो जाते है और अगर प्राइस गिरता है तो पोज़िशंस बेचकर लॉस को कम किया जाता है।
ये टोकंस उन मार्केट्स के लिए बेस्ट है जहा प्राइस एक ही दिशा में चल रहा हो। अगर मार्केट बहुत ज़्यादा वोलेटाइल हो जाता है, तो वैल्यू डीके हो सकती है। इसलिए leveraged टोकन से जुड़े हुए नियमो को समझना बहुत ही ज़रूरी है।
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Leveraged Tokens और दूसरे ट्रेडिंग ऑप्शंस में क्या फर्क है?
इन टोकंस के यूनिक फीचर्स को समझना हमारे लिए ज़रूरी है, ताकि हमे बाकी ट्रेडिंग ऑप्शंस से इसका फर्क समझ आ सके|

क्या फ़र्क़ हैं Leveraged Tokens और मार्जिन ट्रेडिंग ?
Leveraged Tokens:
- प्री-पैकेज्ड, टोकेनाइज़्ड प्रोडक्ट्स होते है जो आपको एसेट पे leveraged एक्सपोज़र देते है।
- मार्जिन एकाउंट्स या कोलैटरल की ज़रूरत नहीं होती।
- Liquidation का रिस्क नहीं होता, क्यों की rebalancing ऑटोमेटेड होती है।
- लेवरेज पैसिवली और खुद से मेन्टेन होती है।
मार्जिन ट्रेडिंग
- इसमें आपको ब्रोकर या किसी एक्सचेंज से फंड्स लेने पढ़ते है, अपनी ट्रेडिंग पोज़िशंस को बढ़ाने के लिए।
- कोलैटरल की ज़रुरत होती है अगर लॉस ज़्यादा हो जाए, और इससे liquidation भी हो सकती है।
- लेवरेज को मैन्युअली एडजस्ट और मेन्टेन करना पड़ता है।
- Borrowing इंटरेस्ट के पैसे लगते है।
यह टोकंस मार्जिन ट्रेडिंग के झंझटो और liquidation के रिस्क को दूर करके आपको एक आसान उपाय देती है।
क्या फ़र्क़ हैं Leveraged Tokens और फ्यूचर ट्रेडिंग ?
Leveraged Tokens
- टोकेनाइज़्ड इंस्ट्रूमेंट्स होते है जो अंडरलाइंग एसेट्स के प्राइस को बढ़ाते है।
- इनमे एक्सपायरी डेट नहीं होती, और मार्जिन मैनेज करने की कोई ज़रुरत नहीं होती।
- शार्ट टर्म ट्रेड्स के लिए बेस्ट होते है जहा सिम्पलीसिटी और ऑटोमेशन ज़रूरी होते है।
- कॉस्ट में borrowing इंट्रेस्ट्स शामिल होते है, लेकिन ऑनगोइंग फंडिंग रेट नहीं होता।
फ्यूचर ट्रेडिंग
- Contractual एग्रीमेंट्स होते है, जिसमे एसेट्स को एक फिक्स्ड प्राइस और समय में खरीदना या बेचना पड़ता है।
- फ्लेक्सिबल ट्रेडिंग स्ट्रैटेजी जैसे हेजिंग भी अवेलबल होती है, और लेवरेज का कोई लिमिट नहीं होता।
- एक्टिव मार्जिन मैनेजमेंट और फंडिंग की ज़रुरत होती है।
- लॉन्ग टर्म कमिटमेंट के लिए सुइटेबल होते है।
फ्यूचर ट्रेडिंग ज़्यादा फ्लेक्सिबिलिटी और लॉन्ग टर्म oppurtunity देता है, जबकि यह शार्ट टर्म लाभ चाहने वाले ट्रेडर्स के लिए है जो मार्जिन या फंडिंग मैनेजमेंट की झंझट नहीं चाहते।
क्या फ़र्क़ हैं Leveraged Tokens और स्पॉट ट्रेडिंग ?
Leveraged Tokens
- आपके अंडरलाइंग एसेट्स के प्राइस मूवमेंट को बढ़ाता है, जो आपके पोटेंशियल गेन और लॉस को बढ़ावा देता है।
- ट्रेडिशनल कोलैटरल मैनेज करने की ज़रुरत नहीं होती।
- डायरेक्शनल ट्रेड्स के लिए सबसे अच्छे होते है जहा आपको लेवरेज चाहिए होता है।
स्पॉट ट्रेडिंग
- में एसेट्स का खरीदना और बेचना होता है जिसमे सीधा ओनरशिप मिलती है।
- लेवरेज नहीं होता, इसका मतलब यह है की लॉस बढ़ेगा नहीं।
- उन ट्रेडर्स के लिए अच्छा होता है जो रिस्क लेना नहीं चाहते है।
स्पॉट ट्रेडिंग एक आसान ऑप्शन है जिससे सीधा एक्सपोज़र मिलता है, जबकि यह टोकंस उन ट्रेडर्स के लिए है जो प्राइस मूवमेंट्स को स्पेक्युलेट करना चाहते है और ज़्यादा रिवार्ड्स कामना चाहते है।
| Do You Know?
Morocco is set to reverse its 2017 ban on Bitcoin and cryptocurrencies, with a draft law regulating crypto assets in the final stages of adoption. This marks a significant policy shift driven by increasing crypto adoption. |
सनक्रिप्टो जल्द ही Leveraged Tokens लॉंच करने जा रहा है…
सनक्रिप्टो जो की भारत का लीडिंग FIU रजिस्टर्ड क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज है, 5x शार्ट और लॉन्ग लेवरेज के साथ leveraged tokens लॉंच करने का प्लॉन बना रहा है। इससे सनक्रिप्टो भारत का पहला एक्सचेंज बनेगा जो यह सर्विस देगा।

यह स्टेप यह दिखाता है की हम अपने यूज़र्स की डिमांड को समझते है और उन्हें रेवेनुए बढ़ने का ऑप्शन देना चाहते है। हाला की सनक्रिप्टो ने अबतक किसी भी तारीख की घोषणा नहीं की है, पर जैसे ही यह लॉंच होता है, हम अपने सोशल मीडिया चैनल से यूज़र्स को बता देंग।
Leveraged Tokens से जुड़े रिस्क्स क्या हैं ?
ट्रेडर्स को इससे जुड़े रिस्क्स को भी ध्यान से समझना चाहिए ताकि वो लॉस से बच सके
- लेवरेज प्रॉफिट के साथ लॉस को भी बढ़ाता है। अगर मार्केट आपके पोजीशन के अगेंस्ट चलता है, तो आपको भारी लॉस हो सकता है।
- क्रिप्टो मार्केट वोलेटाइल होता है और यह टोकंस उन अचानक के प्राइस स्विंग्स के लिए सेंसिटिव होते है, जो लॉस का कारन भी बन सकते है।
- यह टोकंस रोज़ के ट्रेड्स के लिए बने है, इसके लिए यह लॉन्ग टर्म होल्डिंग के लिए सही नहीं है।
- यह रिस्की होते है जिस वजह से यह कम अनुभव वाला ट्रेडर के लिए नहीं है।
आखिर मे…..
Leveraged Tokens एक यूनिक तरीका है जिससे आप क्रिप्टो मार्केट में अपने प्रॉफिट को बढ़ा सकते है बिना मार्जिन ट्रेडिंग के झंझट के। यह शार्ट टर्म ट्रेडिंग में बड़े रिवार्ड्स दे सकते है पर इसके रिस्क भी बड़े होते है।
यह टोकंस कम अनुभव वाले ट्रेडर्स के लिए नहीं है, बल्कि उनके लिए है जो मार्केट डायनामिक्स को समझते है। याद रखिए की क्रिप्टो की दुनिया में सोच समझकर इन्वेस्ट करने से ही आपको ज़्यादा प्रॉफिट मिल सकता है।
Leveraged Tokens के बारे में और जानने के लिए SunCrypto Academy देखे।
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