XRP price का ट्रेंड काफी समय से निचे रहा है, जिसने इन्वेस्टर और अनलिस्ट्स दोनों का ध्यान खींच लिया है। February 2026 में, ये कॉइन लगभग ₹128 के आस-पास ट्रेड कर रहा है, जो July 2025 के पीक से 50% से ज़्यादा की गिरावट को दिखाता है। इस डिक्लाइन ने क्रिप्टो कम्युनिटी के अंदर काफी विवादों को जनम दिया है, जहाँ टेक्निकल ब्रेकडाउन्स से लेकर मैक्रोइकॉनॉमिक प्रेशर तक कई फैक्टर्स इस स्लंप के लिए ज़िम्मेदार माने जा रहे हैं। चलिए आज उन्ही सभी फैक्टर्स को विस्तार से समझते है।
XRP Price का वर्तमान परफॉरमेंस कैसा है?
XRP price हाल ही में काफी ज़्यादा डाउनवर्ड प्रेशर फेस कर रहा है, और जैसा की हमने पहले भी चर्चा की है, आज, February 5, 2026 में यह लगभग ₹128 के आस पास ट्रेड कर रहा है। सिर्फ पिछले 24 घंटो में ही लगभग 9–11% की शार्प डिक्लाइन देखी गयी है, जहाँ सेशन के दौरान प्राइस ₹100 के लौ तक भी चला गया।
July 2025 की तुलना में, XRP price 60% से ज़्यादा गिर चूका है, और पिछले एक हफ्ते में करीब 25% और पिछले एक महीने में 40% से ज़्यादा का नुक्सान रिकॉर्ड किया है।

XRP Price ने ज़रूरी सपोर्ट लेवल्स क्यों ब्रेक किये?
इस कॉइन ने बार-बार ही ज़रूरी सपोर्ट ज़ोन्स को टेस्ट किया और वहां सस्टेन करने में असमर्थ रहा, जिसके चलते सेलिंग और तेज़ हो गयी। काफी महीनो तक टोकन ₹200 के ऊपर बना रहा, जिससे होल्डर्स का कॉन्फिडेंस मज़बूत था, लेकिन लेट January 2026 में ये लेवल टूट गया और रिकवरी नहीं हो पायी। इस ब्रेकडाउन के बाद डेली और वीकली चार्ट्स पर लोअर हाइस और लोअर लोस का पैटर्न बना, और मोमेंटम इंडीकेटर्स भी कमज़ोर हो गए।
अभी XRP price अपने पुराने कंसोलिडेशन रेंज से काफी नीचे ट्रेड कर रहा है, जहाँ पास में मज़बूत टेक्निकल सपोर्ट लगभग ना के बराबर है। शार्ट-टर्म बोउन्सेस ज़रूर आते हैं, लेकिन वो डाउनट्रेंड को चेंज नहीं कर पाते, क्यूंकि प्राइस तब तक बियरीश स्ट्रक्चर में ही लॉक्ड रहेगा जब तक हायर लेवल्स वापस रिक्लेम नहीं होते।
XRP Price ड्रॉप के पीछे कैटलिट्स की क्या भूमिका है?
SEC लोसूट का रेसोलुशन, XRP ETFs का लॉंच जिसमे $1.3 billion के इनफ्लौस आये, और Ripple का Singapore में एक्सपेंशन या फिर RLUSD stablecoin जैसे पोसिटिव डेवलपमेंट्स के बावजूद भी, XRP price स्ट्रगल करता रहा है। जो कैटलिट्स पहले ग्रोथ ड्राइव करने के लिए एक्सपेक्ट किए जा रहे थे, वो अब थके हारे लग रहे हैं, जिससे प्रॉफिट-टेकिंग और एंथोसिअसम में कमी देखी जा रही है।
फ्रेश ड्राइवर्स के बिना, ये कॉइन आज आर्गेनिक डिमांड की कमी से जूझ रहा है और ज़्यादा तर स्पेक्युलेटिव न्यूज़ पर निर्भर करता है, जो जल्दी फेड हो जाती है। हिस्टोरिकल डेटा भी दिखाता है की प्राइस अक्सर हाइप पर रैली करता है—जैसे 2023 का SEC विक्ट्री या 2024 का Trump पंप—और बाद में वापस गिर जाता है। इससे ये क्लियर होता है की सुस्टेंड एडॉप्शन के बजाय एक्सटर्नल फैक्टर्स ही इसके प्राइस मूवमेंट्स को कण्ट्रोल करते रहे हैं।

मार्केट लेवरेज XRP Price को कैसे प्रभावित करती है?
- हाई लेवरेज ने मार्केट में XRP price के क्रॅशेस को और ज़्यादा एम्प्लिफाई किया है, जैसे October 2025 का 45% इंट्राडे ड्रॉप जो टैरिफ थ्रेट्स की वजह से हुआ।
- अर्ली 2026 से अब तक $6 billion के लिक्विडेशन्स हो चुके हैं, खासकर Bitcoin और Ethereum में, जिसका प्रेशर XRP पर भी पड़ा है।
- ड्राप के बाद भी ओपन इंटरेस्ट काफी ऊपर है, जो अगर डाउनटर्न कंटिन्यू होता है तो कैस्केडिंग सेल-ऑफस का रिस्क बढ़ा देता है।
- ऑन-चैन डेटा पैनिक सेलिंग को कन्फर्म करता है, जहाँ लॉस-मेकिंग ट्रांसेक्शन्स प्रॉफ़िट्स से ज़्यादा हो गए हैं, और 97 million से ज़्यादा XRP एक्सचैंजेस पर भेजे गए है, जिससे सेल-साइड प्रेशर और तेज़ हो गया है।
ग्लोबल इकनोमिक फैक्टर्स का XRP Price पर क्या प्रभाव है?
ग्लोबल इकनोमिक फैक्टर्स ने भी XRP Price के डिक्लाइन को और ज़्यादा ख़राब किया है। Bitcoin की कमज़ोरी—जो एक हफ्ते में 14% गिरा , पूरे क्रिप्टो मार्केट करेक्शन को रिफ्लेक्ट करती है। Trump के टैरिफ ने अनिश्चितता और भी बढ़ा दी है, और Federal Reserve के रेट कट्स भी कॉन्फिडेंस बूस्ट नहीं कर पाए, क्यूंकि फ्यूचर पालिसी को लेकर इंटरनल डिसअग्रीमेंट्स अब भी हैं। XRP का प्राइस, जो Bitcoin के साथ हाइली कोरिलेटेड है, रिस्क-ऑफ सेंटीमेंट के चलते कैपिटल ऑउटफ्लोस फेस कर रहा है, जब इन्वेस्टर सेफ एसेट्स की तरफ शिफ्ट कर रहे हैं।
साथ ही, Ripple के मंथली 1 billion XRP अनलॉक्स सप्लाई प्रेशर को और बढ़ा देते हैं, जो वीक मैक्रो एनवायरनमेंट में डिमांड को ओवेरवेल्म कर देता है। सीसोनालिटी डेटा भी दिखाता है की February मंथ अक्सर XRP price के लिए नेगटिव होता है, जहाँ एवरेज रिटर्न्स -8% के आस-पास रहे हैं, जो डाउनसाइड को और कंपाउंड करता है।
आखिर मे…
ओवरआल देखा जाए तो XRP price का गिरना टेक्निकल फेलियर, एक्सहोस्टेड कैटलिट्स, लेवरेज रिस्क्स, मैक्रोइकॉनॉमिक हेडविन्डस और बियरीश ऑन-चैन सिग्नल्स का कंबाइंड रिजल्ट है, जो रिकवरी के लिए एनवायरनमेंट को काफी चुनौतीदार बना देता है। ETF इन्फ़्लोज़ और पोटेंशियल रेगुलेटरी क्लैरिटी जैसे बुलिश फैक्टर्स अभी भी मौजूद हैं, लेकिन शार्ट-टर्म आउटलुक में कॉशन ज़रूरी है, क्यूंकि एक्सट्रीम केस में प्राइस और भी निचे जा सकता है। इन्वेस्टर्स को Bitcoin के स्टेबिलाइजेशन और नए कैटलिट्स पर नज़र रखनी चाहिए, जो रेवेर्सल के साइंस दे सकते हैं।
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