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SEC ने 16 क्रिप्टोकरेन्सिस को डिजिटल कमोडिटी घोषित किया!

SEC से जो 16 डिजिटल कमोडिटीज़ आइडेंटिफाई की गयी हैं, उनके लिए अब सेकेंडरी ट्रेडिंग, स्टैकिंग, और रिलेटेड एक्टिविटीज़ पर सेक्युरिटीज़ लॉ का रिस्क काफी कम हो गया है, और प्राइमरी ओवरसाइट अब CFTC की तरफ शिफ्ट हो रहा है।

Securities and Exchange Commission (SEC) ने क्रिप्टो मार्केट में रेगुलेटरी क्लैरिटी लाने के लिए एक काफी ज़रूरी स्टेप लिया है, एक ग्राउंडब्रेकिंग जॉइंट रिलीज़ के मदद से जो Commodity Futures Trading Commission (CFTC) के साथ आया है। इसका नाम है “Application of the Federal Securities Laws to Certain Types of Crypto Assets and Certain Transactions Involving Crypto Assets” (Release Nos. 33-11412 and 34-105020), और ये तुरंत इफ़ेक्ट में आ गया है, जो पुराने अप्प्रोचेस से एक बड़ा शिफ्ट दिखाता है। कई प्रोमिनेन्ट टोकंस को फॉर्मली डिजिटल कमोडिटी घोषित करके, SEC का उद्देश्य है अप्रतीक्षिता को कम करना, इनोवेशन को बूस्ट करना, और डिजिटल एसेट स्पेस में रेस्पोंसिबल मार्केट ग्रोथ को प्रोत्साहित करना। 

SEC ने कोनसे क्रिप्टो एसेट्स को डिजिटल कमोडिटी घोषित किया है?

SEC ने खासकर 16 क्रिप्टो एसेट्स को डिजिटल कमोडिटीज़ के रूप में आइडेंटिफाई किया है। इस लिस्ट में Aptos, Avalanche, Bitcoin, Bitcoin Cash, Cardano, Chainlink, Dogecoin, Ether, Hedera, Litecoin, Polkadot, Shiba Inu, Solana, Stellar, Tezos, और XRP शामिल हैं। एडिशनल कॉइंस जैसे Algorand और LBRY Credits भी इस लिस्ट को कम्पलीट करते हैं। 

ख़ास बात ये है की इनमे से कई टोकंस—जैसे Solana, XRP, और Cardano—पहले एनफोर्समेंट एक्शन्स या इंवेस्टीगेशंस का हिस्सा रह चुके हैं। अब SEC द्वारा उनका कमोडिटीज़ के रूप में रीक्लासिफिकेशन एक बड़ा लीगल रिस्क हटा देता है और डेवलपमेंट, ट्रेडिंग, और इंस्टीटूशनल एडॉप्शन के लिए ज़्यादा क्लियर पाथवे प्रोवाइड करता है। 

sec

SEC एक डिजिटल कमोडिटी को कैसे डिफाइन करता है?

SEC के मुताबिक, डिजिटल कमोडिटी एक ऐसा क्रिप्टो एसेट होता है जिसका वैल्यू उसके “फंक्शनल” क्रिप्टो सिस्टम के प्रोग्रामैटिक फंक्शनिंग से इंट्रिन्सिक्ली लिंक्ड होता है, साथ ही नार्मल सप्लाई-डिमांड मार्केट फोर्सेस से, न की किसी दूसरे के मैनेजरियल या एन्त्रेप्रेंयूरिअल एफर्ट्स से प्रॉफिट एक्सपेक्टेशन पर। 

टोकन को अपने नेटवर्क में एक्टिव रोल प्ले करना ज़रूरी है और ये प्राइमरीली पैस्सिव इनकम या इक्विटी-टाइप क्लेम्स रिप्रेजेंट नहीं कर सकता। डीसेंट्रलाइज़ेशन को एक ज़रूरी फैक्टर माना गया है, लेकिन SEC इसे मेंडेटरी कंडीशन नहीं मानता, जो एक प्रैक्टिकल और फ्लेक्सिबल क्लासिफिकेशन टेस्ट प्रोवाइड करता है। 

SEC ने किस तरह की टोकन टेक्सेनॉमी इंट्रोड्यूस की है?

SEC ने मार्केट पार्टिसिपेंट्स के लिए एक क्लियर 5-केटेगरी टेक्सेनॉमी इंट्रोड्यूस की है:

  • डिजिटल कमोडिटीज़ (जैसे Bitcoin और Ether जैसे फंक्शनल एसेट्स)
  • डिजिटल कलेक्टिबल्स (NFTs)
  • टूल्स (यूटिलिटी टोकंस जो स्पेसिफिक इकोसिस्टम से लिंक्ड होते हैं)
  • पेमेंट stablecoins (GENIUS Act जैसे फ़्रेमवर्क्स के द्वारा गवर्नड)
  • डिजिटल सेक्युरिटीज़ (जो अभी भी फुल फ़ेडरल सेक्युरिटीज़ रेगुलेशन के अंडर आते हैं)

ये स्ट्रक्चर्ड फ्रेमवर्क एसेट टाइप्स को क्लेअरली डिफ्रेंशिएट करता है और ये बताता है की कौनसे एसेट्स सेक्युरिटीज़ लॉ के अंडर आते हैं और कौनसे कमोडिटी रेगुलेशन के अंडर। 

SEC ने इस रिलीज़ के बारे में क्या कहा?

SEC Chair Paul Atkins ने इस गाइडेंस को डिस्क्राइब किया है एक “clear understanding of how the Commission treats crypto assets under federal securities laws.” के रूप में। उन्होंने एम्फसाइज़ किया की रेगुलेटर्स को “clear lines in clear terms” ड्रा करनी चाहिए। 

उन्होंने एक “फिट-फॉर-पर्पस स्टार्टअप एक्सेम्पशन” सेफ हार्बर का आईडिया भी सजेस्ट किया, जिससे अर्ली-स्टेज क्रिप्टो प्रोजेक्ट्स टेम्पोररीली बिना फूल रजिस्ट्रेशन के फंड्स रेज़ कर सके या ऑपरेट कर सके। ये स्टेटमेंट्स SEC के बैलेंस्ड और इनोवेशन-फ्रेंडली एप्रोच को हाईलाइट करते हैं। 

SEC ने स्टॉकिंग, एयरड्रॉप्स, और रैपिंग को कैसे क्लैरिफाई किया है?

SEC ने कुछ इम्पोर्टेन्ट प्रैक्टिकल एक्टिविटीज़ को भी क्लैरिफाई किया है:

  • प्रोटोकॉल-लेवल स्टैकिंग और माइनिंग को आम तौर पर सेक्युरिटीज़ ट्रांसेक्शन्स नहीं माना जायेगा। 
  • नॉन-सिक्योरिटी क्रिप्टो एसेट को रैप करने से वो औटोमाटिकली सिक्योरिटी नहीं बन जाता। 
  • एयरड्रॉप्स को Howey टेस्ट के अंडर परिक्षण किया जायेगा, और फ्री डिस्ट्रीब्यूशंस (जहाँ कोई इन्वेस्टमेंट नहीं होता) आम तौर पर सेक्युरिटीज़ लॉ के बहार आते हैं। 

ये क्लैरिफिकेशन्स रोज़ के क्रिप्टो ऑपरेशन्स के लिए कंप्लायंस बर्डन को काफी हद तक रिड्यूस कर देते हैं। 

यह फ्रेमवर्क मौजूदा रेगुलेशंस के साथ कैसे काम करेगा?

ये रिलीज़ कोई लेजिस्लेशन नहीं है, लेकिन एक टेम्पररी फ्रेमवर्क की तरह काम करता है जब तक Congress कुछ मेजर बिल्स पर काम कर रहा है:

  • CLARITY Act (स्पॉट डिजिटल कमोडिटी मार्केट्स को CFTC के अंडर लाना)
  • GENIUS Act (फ़ेडरल stablecoin फ्रेमवर्क क्रिएट करना)

दोनों बिल्स अभी कमिटी स्टेज में प्रोग्रेस कर रहे हैं। SEC का ये गाइडेंस एक बाईपार्टिसन, कमीशन-लेवल स्टेटमेंट होने के कारन काफी इन्फ्लुएंशियल माना जा रहा है और फ्यूचर लॉज़ को शेप कर सकता है। 

आखिर में…

SEC से जो 16 डिजिटल कमोडिटीज़ आइडेंटिफाई की गयी हैं, उनके लिए अब सेकेंडरी ट्रेडिंग, स्टैकिंग, और रिलेटेड एक्टिविटीज़ पर सेक्युरिटीज़ लॉ का रिस्क काफी कम हो गया है, और प्राइमरी ओवरसाइट अब CFTC की तरफ शिफ्ट हो रहा है। हाँ, कुछ बॉर्डरलाइन केसेस अभी भी डिटेल्ड एनालिसिस डिमांड करेंगे और फ्यूचर अड्मिनिस्ट्रेशन्स इंटरप्रेटेशन्स को रीविजिट कर सकते हैं, लेकिन ये फ्रेमवर्क मार्केट को स्ट्रांग क्लैरिटी और ग्रोथ का सॉलिड फाउंडेशन प्रोवाइड करता है।

डिस्क्लेमर: क्रिप्टो उत्पाद और एनएफटी अनियमित हैं और अत्यधिक जोखिम भरे हो सकते हैं। ऐसे लेनदेन से होने वाले किसी भी नुकसान के लिए कोई नियामक सहारा नहीं हो सकता है। प्रदान की गई सभी सामग्री केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है, और निवेश सलाह के रूप में इस पर भरोसा नहीं किया जाएगा। हम आपको सलाह देते हैं कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले कृपया स्वयं शोध करें या किसी विशेषज्ञ से परामर्श लें।आप हमें [email protected] पर लिख सकते हैं।

अक्सर पूछे गए सवाल

क्या भारत में crypto legal है?

हाँ, भारत में क्रिप्टोकरेंसी (Cryptocurrency) खरीदना, बेचना और रखना वैध (Legal) है, लेकिन यह कानूनी मुद्रा (Legal Tender) नहीं है।

भारत में बेस्ट crypto exchange कोनसा है?

भारत में बेस्ट crypto exchange SunCrypto है।

क्या SunCrypto सुरक्षित है?

हाँ।

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